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किसान हूं मैं

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मिट्टी  में  ही  जन्म  लिया  हूं और मिट्टी में ही मिल जाना है हल  चलाकर  इस  मिट्टी  को  कोमल  मुझे  बनाना  है सींच  दूंगा  मेहनत से  अपने इस मिट्टी में फसल उगाना है धूप-छांव  की  परवाह  नहीं  मुझ को.......किसान हूं मैं मुझे इस मिट्टी का क़र्ज़ चुकाना है

हिंदी कविता

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राह है...हिंदी...डगर है....हिंदी गंगा में बहती लहर है.....हिंदी नगर है...हिंदी..निगम है..हिंदी रस छिंद का सागर भंवर है...हिंदी भाव है...हिंदी....लगाव है....हिंदी रामधारी दिनकर जी के कलम का धूप......और......छांव है......हिंदी देश है...हिंदी...स्वदेश है.....हिंदी हिंदुस्तान का रंग रूप भेश है...हिंदी जन गण है...हिंदी...कण कण है...हिंदी भारत की भाषा का तन मन है.... हिंदी

सबकी सुनने वाला व्यक्ति अक्सर खुद की नहीं सुन पाते..!!

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                सबकी सुनने वाला व्यक्ति               अक्सर खुद की नहीं सुन पाते..!!

विराम चिन्ह् का प्रयोग....✍️

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                 विराम चिन्ह् का प्रयोग आपने अक्सर किसी किताब,कहानी,अखबार,लेख आदि। को पढ़ते समय या लिखते समय विराम चिन्ह को वाक्य तथा भाषा के अंत में अवश्य ही देखा होगा। या स्वयं आपने विराम चिन्हों का प्रयोग भी किया होगा। विराम चिन्ह का प्रयोग किसी भी भाषा तथा किसी वाक्य को पूर्ण रूप से पढ़ना तथा समझने के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण होता है। कहे तो जिस प्रकार एक स्त्री के सिंगार में उसका आभूषण की बहुत ही महत्वपूर्णता होती है। ठीक उसी प्रकार भाषा तथा वाक्यों के लिए भी विराम चिन्ह उनकी महत्वपूर्णता है। अगर मुख्य तौर पर कहे तो बिन विराम चिन्ह के वाक्य तथा भाषा को समझना बहुत ही कठिन है। क्या आप जानते हैं। कि विराम चिन्ह कितने प्रकार के होते हैं। तथा उनका प्रयोग किस वाक्यों के लिए और किस समय किया जाता हैं। अगर आप नहीं जानते तो कोई बात नहीं यहां हम कुछ महत्वपूर्ण विराम चिन्ह की चर्चा करेंगे। जिससे आपको विराम चिन्ह को समझने वा प्रयोग करना करने में आसानी होगी। ( 1 ) अल्पविराम (Comma) : अल्पविराम का प्रयोग वाक्य के पूर्ण होने के...

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 वक्त ही नहीं अब तो.... लोग भी बदलते हैं पल पल...!!

बिन विद्युत जलने वाला टॉर्च - जुगनू

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अगर मैं कहूं कि बिना विद्युत या बिना बिजली-बैटरी से चलने वाला उड़ता फिरता टॉर्च तो आपके मस्तक में बस एक ही नाम सामने आएगा हां बिल्कुल वही हम बात कर रहे हैं जुगनू की जो अंग्रेजी में ( firefly ) के नाम से जाने जाते हैं। तथा इनको 'आग का कीड़ा ' भी कहते हैं।  आपने कभी ना कभी कहीं ना कहीं इन जुगनू को रात्रि के समय उड़ते हुए जरूर देखा होगा। जुगनू ज्यादातर बरसात के मौसम में देखने को मिलते हैं जब हवाओं में नमी होती है। रात्रि के समय तारों की तरह जगमगाते हुए इधर से उधर उड़ते फिरते हैं। मानो ऐसा लगता है कि किसी ने उनके ऊपर छोटे-छोटे बल्ब बांध दिया हो और उन्हें उड़ने को इधर से उधर छोड़ दिया है। परंतु ऐसा कुछ भी नहीं है जुगनू " ल्युसिफेरेस वा ल्यूसिफेरिन प्रोटीन " के कारण चमकते हैं। यह अक्सर पीले हरे व लाल रंग में चमकते हैं। जुगनू से निकलने वाला प्रकाश ऊष्मा हीन होता हैं। प्रकाश चाहे किसी भी प्रकार का हो उसमें गर्मी जरूर पैदा होती है। परंतु जुगनू में ऐसा नहीं है विज्ञानिक भी अभी इस बात की खोज नहीं कर पाए हैं की जुगनू के प्रकाश में उस्मा क्यों नहीं होता। जुगनू कीट क...