किसान हूं मैं
मिट्टी में ही जन्म लिया हूं
और मिट्टी में ही मिल जाना है
हल चलाकर इस मिट्टी को
कोमल मुझे बनाना है
सींच दूंगा मेहनत से अपने
इस मिट्टी में फसल उगाना है
धूप-छांव की परवाह नहीं
मुझ को.......किसान हूं मैं
मुझे इस मिट्टी का क़र्ज़ चुकाना है
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