बिन विद्युत जलने वाला टॉर्च - जुगनू


अगर मैं कहूं कि बिना विद्युत या बिना बिजली-बैटरी से चलने वाला उड़ता फिरता टॉर्च तो आपके मस्तक में बस एक ही नाम सामने आएगा हां बिल्कुल वही हम बात कर रहे हैं जुगनू की जो अंग्रेजी में ( firefly ) के नाम से जाने जाते हैं। तथा इनको 'आग का कीड़ा ' भी कहते हैं। 
आपने कभी ना कभी कहीं ना कहीं इन जुगनू को रात्रि के समय उड़ते हुए जरूर देखा होगा। जुगनू ज्यादातर बरसात के मौसम में देखने को मिलते हैं जब हवाओं में नमी होती है। रात्रि के समय तारों की तरह जगमगाते हुए इधर से उधर उड़ते फिरते हैं। मानो ऐसा लगता है कि किसी ने उनके ऊपर छोटे-छोटे बल्ब बांध दिया हो और उन्हें उड़ने को इधर से उधर छोड़ दिया है। परंतु ऐसा कुछ भी नहीं है जुगनू " ल्युसिफेरेस वा ल्यूसिफेरिन प्रोटीन " के कारण चमकते हैं। यह अक्सर पीले हरे व लाल रंग में चमकते हैं। जुगनू से निकलने वाला प्रकाश ऊष्मा हीन होता हैं। प्रकाश चाहे किसी भी प्रकार का हो उसमें गर्मी जरूर पैदा होती है। परंतु जुगनू में ऐसा नहीं है विज्ञानिक भी अभी इस बात की खोज नहीं कर पाए हैं की जुगनू के प्रकाश में उस्मा क्यों नहीं होता।

जुगनू कीट के समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। तथा पूरी दुनिया में इनकी 2000 से अधिक प्रजातियां पाई जाती है। इनमें से जो मादा होती है उनके पंख नहीं होते वह एक कीड़े के समान होती है वह एक ही स्थान पर रहकर चमकती है। नर जुगनू के पंख होते हैं। जो उड़ते हुए हमें दिखाई देते हैं। आपने जितने जुगनू को उड़ते हुए देखा होगा वह सभी नर होते हैं। इनकी लंबाई 0.5 सेंटीमीटर के आसपास होती है। जुगनू के केंचुए व विभिन्न प्रकार के वनस्पति को खाते हैं। दिन के समय अगर जुगनू को ढूंढना हैं।तो या अक्सर आपको पेड़ की टहनियों में या घास और पत्थरों के नीचे दिखाई देंगे। जुगनू अपने अंडे पेड़ की टहनियों वाह घास और पत्थरों के नीचे ही देते हैं। अपने रहने वाले स्थान पर

जुगनू की विभिन्न प्रजातियों विभिन्न देशों में पाई जाती हैं। जिसमें से भरपूर रोशनी से चमचमाते हुए अधिकतर जुगनू भारत,वेस्टइंडीज,थाईलैंड,भूटान,दक्षिण अफ्रीका,दक्षिण अमेरिका आदि। मैं पाए जाते हैं।

लेखक : रोhit Singh

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